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अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% हुई, खाद्य महंगाई 5.95% पर पहुँची

Author: Hitesh kumar • • •4 टिप्पणियां
Hitesh kumar
Author Hitesh kumar

मैं New Samachar में Founder & Editor के रूप में समाचार और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को पाठकों तक सरल, स्पष्ट और जिम्मेदार तरीके से पहुँचाने का कार्य करता हूँ। मेरा…

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अगस्त में महंगाई ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। खाने-पीने की चीजों की महंगाई भी बढ़ी है और इसका असर घर के रोजमर्रा के बजट पर पड़ सकता है।

14 सितंबर को जारी आंकड़ों में खाद्य महंगाई 5.95 प्रतिशत दर्ज की गई। गांवों में खुदरा महंगाई 5.23 प्रतिशत रही, जबकि शहरों में यह 4.31 प्रतिशत थी। आगे जानते हैं कि अगस्त में किन चीजों के दाम ज्यादा बढ़े और आम परिवार के लिए इन आंकड़ों का क्या मतलब है।

खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाया दबाव

अगस्त में खाद्य महंगाई बढ़कर 5.95 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 5.52 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई खाने-पीने की चीजों के दाम पिछले साल के मुकाबले बढ़े हैं। गांवों में खाद्य महंगाई 6.13 प्रतिशत और शहरों में 5.64 प्रतिशत दर्ज की गई।

प्याज की कीमतों में 48.27 प्रतिशत, लहसुन में 43.60 प्रतिशत और अदरक में 73.82 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज हुई। हालांकि हर सब्जी महंगी नहीं हुई। टमाटर और आलू के दाम पिछले साल की तुलना में कम रहे, जिससे परिवारों को कुछ राहत मिली। यानी अगस्त की महंगाई का असर सभी सामान पर एक जैसा नहीं था।

कच्चा तेल महंगा होने से भी बढ़ी चिंता

खाने-पीने की चीजों के साथ ईंधन की बढ़ती लागत भी चिंता बढ़ा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसलिए अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है तो देश का आयात खर्च बढ़ सकता है।

महंगे ईंधन का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। सामान ढोने वाले ट्रक, हवाई यात्रा और कई उद्योगों का खर्च भी इससे जुड़ा होता है। लागत लगातार बढ़ने पर इसका कुछ असर आगे सामान और सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

हालांकि कच्चा तेल महंगा होने का मतलब यह नहीं है कि हर चीज तुरंत महंगी हो जाएगी। काफी कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि तेल की कीमत कितने समय तक ऊंची रहती है।

आम परिवार के बजट पर क्या असर पड़ सकता है?

महंगाई का सबसे सीधा असर घर के रोजमर्रा के खर्च में दिखाई देता है। दूध, राशन, खाद्य तेल और दूसरी जरूरी चीजों के दाम बढ़ने पर परिवार का मासिक खर्च भी बढ़ जाता है।

इसका असर हर घर पर एक जैसा नहीं होता। जिन परिवारों की कमाई का बड़ा हिस्सा खाने-पीने, गैस, ईंधन और आने-जाने में खर्च होता है, उन्हें बढ़ी कीमतों का दबाव ज्यादा महसूस हो सकता है।

4.8 प्रतिशत महंगाई का मतलब यह भी नहीं है कि बाजार की हर चीज 4.8 प्रतिशत महंगी हो गई। CPI अलग-अलग सामान और सेवाओं की कीमतों को मिलाकर तैयार होता है। कुछ चीजें ज्यादा महंगी हो सकती हैं, जबकि कुछ की कीमत कम भी हो सकती है।

RBI के लिए क्यों अहम है अगस्त का आंकड़ा?

अगस्त लगातार तीसरा महीना रहा जब खुदरा महंगाई RBI के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर दर्ज हुई। इसके बावजूद 4.82 प्रतिशत की दर अभी RBI की 2 से 6 प्रतिशत वाली तय सीमा के अंदर है।

महंगाई बढ़ने के बाद ब्याज दरों को लेकर चर्चा जरूर तेज हो सकती है, लेकिन केवल एक महीने के आंकड़े से Repo Rate बढ़ना तय नहीं होता। RBI आने वाले महीनों की महंगाई, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की स्थिति और आर्थिक growth जैसे कई पहलुओं को देखने के बाद फैसला करता है।

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आगे किन बातों पर नजर रहेगी?

अगले कुछ महीनों में खाने-पीने की चीजों और कच्चे तेल की कीमत सबसे अहम रहेंगी। अगर प्याज, खाद्य तेल और दूसरी जरूरी चीजों के दाम लंबे समय तक ऊंचे रहते हैं, तो परिवारों के मासिक खर्च पर दबाव बना रह सकता है। वहीं महंगा कच्चा तेल माल ढुलाई और कारोबार की लागत बढ़ा सकता है।

सितंबर 2026 की खुदरा महंगाई के आंकड़े 12 अक्टूबर को जारी किए जाएंगे। उनसे पता चलेगा कि अगस्त में दिखी बढ़ोतरी केवल एक महीने तक सीमित रही या महंगाई का दबाव आगे भी बना हुआ है।

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