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Online Shopping Rules 2027: Fake Discount पर लगेगी लगाम, 1 जनवरी से बदलेंगे ये 8 नियम

Author: Hitesh kumar 0 टिप्पणियां
Hitesh kumar
Author Hitesh kumar

मैं New Samachar में Founder & Editor के रूप में समाचार और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को पाठकों तक सरल, स्पष्ट और जिम्मेदार तरीके से पहुँचाने का कार्य करता हूँ। मेरा…

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ऑनलाइन खरीदारी करते समय 70% या 80% की छूट देखकर अक्सर लगता है कि कोई सामान बहुत कम कीमत पर मिल रहा है। लेकिन कई बार जिस पुरानी कीमत को काटकर बड़ा discount दिखाया जाता है, उस कीमत पर सामान हाल के दिनों में बेचा ही नहीं गया होता। इसी तरह search result में सबसे ऊपर दिखाई देने वाला product हमेशा सबसे अच्छा विकल्प नहीं होता; वह paid या sponsored listing भी हो सकता है।

ऑनलाइन ग्राहकों को ऐसी भ्रामक जानकारी से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने Consumer Protection (E-Commerce) Rules में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

इनके लागू होने के बाद e-commerce platforms को discount, पिछली कीमत, sponsored listing, seller, return-refund, warranty और imported product से जुड़ी जानकारी पहले से अधिक स्पष्ट तरीके से दिखानी होगी।

इस खबर में क्या है?

एक नजर में समझें नए Online Shopping Rules

  • Discount के साथ पिछले 30 दिनों की सबसे कम कीमत दिखानी होगी।
  • Sponsored products की पहचान साफ और प्रमुख रूप से बतानी होगी।
  • Search results में ग्राहक को भ्रमित करने वाली हेरफेर नहीं की जा सकेगी।
  • Return, refund, exchange और warranty की जानकारी खरीदारी से पहले देनी होगी।
  • Seller का नाम invoice में साफ और प्रमुख रूप से दिखाई देगा।
  • Imported product पर importer और country of origin की जानकारी मिलेगी।
  • ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना उसकी जानकारी का निर्धारित कामों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
  • E-commerce companies को हर साल dark patterns की जांच करनी होगी।
  • नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

Discount के साथ कौन-सी पिछली कीमत दिखानी होगी?

नए नियम का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव online discount से जुड़ा है।

जब कोई e-commerce platform या seller किसी वस्तु अथवा सेवा की कीमत कम करने की घोषणा करेगा, तो उसे discounted price के साथ उसकी prior price भी दिखानी होगी।

सरकार ने prior price का अर्थ स्पष्ट किया है। यह discount की घोषणा से पहले के 30 दिनों में उस वस्तु या सेवा की सबसे कम कीमत होगी।

मान लीजिए किसी product की कीमत पिछले 30 दिनों में इस प्रकार रही:

  • पहले सप्ताह में ₹1,200
  • दूसरे सप्ताह में ₹1,000
  • तीसरे सप्ताह में ₹1,100
  • Sale के समय ₹899

अब seller discount दिखाते समय ₹1,200 को prior price बताकर छूट को वास्तविकता से अधिक बड़ा नहीं दिखा सकेगा। उसे पिछले 30 दिनों की सबसे कम कीमत यानी ₹1,000 को आधार बनाना होगा।

इससे ग्राहक समझ सकेगा कि sale में उसे वास्तव में कितनी छूट मिल रही है।

Fake Discount पर कैसे लगेगी लगाम?

कई online sales में किसी product की कीमत sale से ठीक पहले बढ़ा दी जाती है। इसके बाद उसी बढ़ी हुई कीमत को काटकर बड़ा discount दिखाया जाता है। ग्राहक को लगता है कि उसे बहुत बड़ी बचत हो रही है, जबकि वास्तविक छूट काफी कम हो सकती है।

नए नियम लागू होने के बाद पिछले 30 दिनों की सबसे कम कीमत महत्वपूर्ण होगी। इससे बढ़ी हुई काल्पनिक कीमत को आधार बनाकर बड़ा discount दिखाना मुश्किल हो जाएगा।

इस बदलाव से:

  • ग्राहक वास्तविक और दिखावटी discount में अंतर कर सकेगा।
  • Festival sale के दौरान कीमतों की तुलना करना आसान होगा।
  • Seller को discount का सही आधार दिखाना होगा।
  • अचानक बढ़ाई गई कीमत को पुरानी कीमत बताना मुश्किल होगा।

हालांकि हर बड़ा discount गलत नहीं होता। खरीदारी से पहले ग्राहक को अंतिम कीमत, delivery charge, seller और return policy भी देखनी चाहिए।

Sponsored Products की पहचान साफ होगी

Online shopping platform पर कोई product search करने पर कुछ listings पैसे देकर ऊपर दिखाई जाती हैं। ग्राहक कई बार उन्हें सबसे popular, सबसे अच्छा या अपनी search से सबसे अधिक संबंधित product समझ लेता है।

नए नियमों के अनुसार sponsored product या service को साफ और प्रमुख जानकारी के साथ अलग पहचान देना जरूरी होगा।

Paid listing पर “Sponsored”, “Ad” या इसी प्रकार की स्पष्ट जानकारी दिखाई जानी चाहिए। इस जानकारी को ऐसे स्थान या रंग में नहीं छिपाया जा सकेगा जिसे ग्राहक आसानी से न देख पाए।

इससे ग्राहक समझ सकेगा कि कोई product केवल popularity या बेहतर rating के कारण ऊपर नहीं दिख रहा, बल्कि वह paid promotion भी हो सकता है।

Search Results में भ्रामक हेरफेर पर रोक

E-commerce platforms को ग्राहक की search के अनुसार उपयोगी और संबंधित results दिखाने होते हैं। नए नियम किसी platform को search result या search index में इस तरह बदलाव करने से रोकते हैं जिससे ग्राहक भ्रमित हो या परिणाम उसकी खोज से कम संबंधित हो जाएं।

यदि ग्राहक किसी विशेष प्रकार का product खोज रहा है तो platform केवल ज्यादा commission देने वाले असंबंधित products को भ्रामक तरीके से ऊपर नहीं दिखा सकेगा।

Search ranking में कीमत, rating, delivery time, popularity और seller performance जैसे कई कारण शामिल हो सकते हैं। Platforms को ranking निर्धारित करने वाले मुख्य मापदंडों की जानकारी सरल और समझने योग्य भाषा में उपलब्ध करानी होगी।

Dark Pattern क्या होता है?

Dark pattern किसी website या application का ऐसा design होता है जो ग्राहक को ऐसा निर्णय लेने के लिए प्रभावित करता है जिसे वह सामान्य स्थिति में नहीं लेना चाहता।

इसके कुछ सामान्य उदाहरण हैं:

  • पहले से चुना हुआ paid add-on
  • Subscription बंद करने का विकल्प छिपाना
  • बिना सही आधार के “केवल एक product बचा है” दिखाना
  • Cart में अपने-आप अतिरिक्त सेवा जोड़ देना
  • जरूरी जानकारी बहुत छोटे अक्षरों में दिखाना
  • बार-बार popup दिखाकर ग्राहक पर दबाव बनाना
  • Free trial के बाद लगने वाले शुल्क की जानकारी छिपाना
  • किसी विकल्प को स्वीकार करना आसान और अस्वीकार करना मुश्किल बनाना

नए नियमों के अंतर्गत e-commerce companies को Dark Patterns से संबंधित 2023 के दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।

हर e-commerce company को साल में एक बार अपने platform का self-audit भी करना होगा। Platform को dark patterns से मुक्त रखने से संबंधित compliance certificate प्रमुखता से दिखाना होगा।

अनावश्यक Bundled Fee पर भी रोक

कुछ platforms मुख्य product या service के साथ ऐसी दूसरी सेवाओं का शुल्क जोड़ देते हैं जिनकी ग्राहक को आवश्यकता नहीं होती। कई बार ये charges checkout page पर पहुंचने के बाद दिखाई देते हैं।

नए नियमों के अनुसार marketplace e-commerce company platform से असंबंधित सेवाओं के लिए bundled fee नहीं वसूल सकेगी।

हालांकि loyalty या membership programme के अंतर्गत मिलने वाली सुविधा, service, offer या incentive को इस प्रावधान से अलग रखा गया है।

ग्राहक को भुगतान करने से पहले order summary में ये चीजें जांचनी चाहिए:

  • Product की वास्तविक कीमत
  • Delivery charge
  • Platform या convenience fee
  • Insurance या protection plan
  • Membership charge
  • अंतिम भुगतान राशि

यह भी पढ़ें :अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% हुई, आम परिवार पर क्या असर पड़ेगा?

Return, Refund और Warranty की जानकारी साफ देनी होगी

Online shopping के कई विवाद return और refund policy से जुड़े होते हैं। Product खरीदने के बाद ग्राहक को पता चलता है कि वह वस्तु return के योग्य नहीं है या refund के लिए कोई विशेष शर्त लागू है।

नए नियमों के अनुसार marketplace को खरीदारी से पहले ये जानकारियां उपलब्ध करानी होंगी:

  • Return policy
  • Refund की शर्तें
  • Product exchange का नियम
  • Warranty और guarantee
  • Delivery और shipment की जानकारी
  • Return shipping का खर्च
  • Payment के उपलब्ध तरीके
  • शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया

इससे ग्राहक product खरीदने से पहले जान सकेगा कि खराब, गलत या पसंद न आने वाला सामान मिलने पर उसके पास क्या विकल्प होंगे।

Food Products पर Best Before की जानकारी

Online बेचे जाने वाले food products के लिए best before या use before की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। यह व्यवस्था Food Safety and Standards Act तथा उससे जुड़े नियमों के अनुसार लागू होगी।

इससे ग्राहक खाने-पीने की वस्तु खरीदने से पहले उसकी उपयोग अवधि देख सकेगा। कम shelf life वाले products के मामले में यह जानकारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी।

ग्राहक को सामान मिलने के बाद packet या label पर लिखी तारीख भी जरूर जांचनी चाहिए।

Invoice में Seller की पहचान स्पष्ट होगी

Online marketplace पर ग्राहक product platform के बजाय उस पर registered किसी seller से खरीदता है। विवाद होने पर कई बार ग्राहक को seller की सही जानकारी खोजने में परेशानी होती है।

नए नियमों के अनुसार invoice में seller का नाम e-commerce company के नाम के समान स्पष्ट font size में दिखाना होगा।

Seller के बारे में उपलब्ध जानकारी में ये बातें शामिल हो सकती हैं:

  • Business का नाम
  • भौगोलिक पता
  • Customer care number
  • Website और email
  • Rating या feedback
  • जरूरी registration details

खरीदारी के बाद विवाद होने पर ग्राहक लिखित अनुरोध करके seller के मुख्य कार्यालय और उपलब्ध शाखाओं की जरूरी जानकारी मांग सकेगा।

Imported Products की जानकारी भी मिलेगी

Imported product बेचते समय importer की जानकारी और country of origin बताना जरूरी होगा।

इससे ग्राहक यह जान सकेगा कि product किस देश में बना है, भारत में उसे किसने import किया है और शिकायत या product issue होने पर किस संस्था से संपर्क किया जा सकता है।

केवल आकर्षक तस्वीर देखकर product खरीदने के बजाय seller, importer, warranty और return policy की जानकारी देखना भी जरूरी होगा।

ग्राहक की जानकारी के इस्तेमाल पर नियंत्रण

E-commerce platforms खरीदारी, search और browsing के दौरान ग्राहकों से अलग-अलग प्रकार की जानकारी एकत्र करते हैं।

नए नियमों के अनुसार marketplace ग्राहक की जानकारी का इस्तेमाल किसी संबंधित या असंबंधित seller के product को बढ़ावा देने के लिए बिना ग्राहक की स्पष्ट सहमति के नहीं कर सकेगा।

ग्राहक की सहमति स्पष्ट और affirmative होनी चाहिए। केवल पहले से चुने checkbox या अस्पष्ट संदेश को पर्याप्त सहमति नहीं माना जाना चाहिए।

ग्राहकों को application permissions, marketing consent और privacy settings समय-समय पर जांचनी चाहिए।

शिकायत करने वाले ग्राहक को क्या मिलेगा?

हर e-commerce company को National Consumer Helpline की convergence प्रक्रिया का partner बनना होगा। इससे शिकायतों को platform और सरकारी consumer grievance system के बीच बेहतर तरीके से संभालने में सहायता मिलेगी।

जब कोई ग्राहक grievance officer के पास शिकायत दर्ज करेगा, तो उसे उसी रूप में दर्ज शिकायत की एक copy भी देनी होगी।

इससे ग्राहक के पास यह record रहेगा कि उसने किस विषय पर शिकायत की, शिकायत कब दर्ज हुई और grievance officer ने उसे किस रूप में record किया।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025 में National Consumer Helpline को कुल 17,71,622 शिकायतें मिली थीं। इनमें 5,11,196 यानी लगभग 29 प्रतिशत शिकायतें e-commerce sector से संबंधित थीं।

नए नियमों से ग्राहक को क्या फायदा होगा?

नए e-commerce rules का उद्देश्य केवल कंपनियों पर नए नियम लागू करना नहीं, बल्कि ग्राहकों को खरीदारी से पहले सही जानकारी उपलब्ध कराना है।

इनसे ग्राहक को कई फायदे मिल सकते हैं:

  • वास्तविक discount समझना आसान होगा।
  • Paid और सामान्य search listing में अंतर दिखाई देगा।
  • Seller की पहचान अधिक स्पष्ट होगी।
  • Return और refund की शर्तें पहले पता चलेंगी।
  • अनावश्यक शुल्क पकड़ना आसान होगा।
  • Imported product की जानकारी मिलेगी।
  • शिकायत का लिखित record मिलेगा।
  • ग्राहक की जानकारी के इस्तेमाल पर नियंत्रण बढ़ेगा।

1 जनवरी 2027 के बाद क्या बदलेगा?

अभी दिखाई देने वाली समस्या नए नियम के बाद बदलाव
बढ़ी हुई कीमत दिखाकर बड़ा discount पिछले 30 दिनों की सबसे कम कीमत दिखानी होगी
Paid product सामान्य result जैसा दिखना Sponsored listing की स्पष्ट पहचान
Search results में भ्रामक ranking ग्राहक को भ्रमित करने वाली manipulation पर रोक
Return-refund की अधूरी जानकारी खरीदारी से पहले जरूरी policy दिखानी होगी
Seller की पहचान अस्पष्ट Invoice में seller का नाम स्पष्ट होगा
अपने-आप जुड़ा अनावश्यक शुल्क असंबंधित bundled fee पर रोक
Dark patterns से ग्राहक पर दबाव वार्षिक self-audit और compliance certificate
Imported product की अधूरी जानकारी Importer और country of origin बताना होगा

Online Shopping करते समय इन बातों का ध्यान रखें

नए नियम लागू होने के बाद भी ग्राहक को सावधानी से खरीदारी करनी चाहिए।

  • Discount के साथ दिखाई गई prior price जांचें।
  • Product की कीमत की दूसरे platforms से तुलना करें।
  • Sponsored listing की पहचान देखें।
  • Seller की rating के साथ पुराने reviews पढ़ें।
  • केवल पांच-star rating देखकर फैसला न करें।
  • Return और refund policy खरीदारी से पहले पढ़ें।
  • Warranty seller देगा या company, यह जांचें।
  • Delivery और return shipping charge देखें।
  • Food product की best-before date जांचें।
  • Imported product का country of origin और importer देखें।
  • Payment page पर अंतिम रकम दोबारा जांचें।
  • Order confirmation, invoice और payment receipt सुरक्षित रखें।

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निष्कर्ष

1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले नए e-commerce rules online shopping को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इनका सबसे बड़ा असर discount दिखाने के तरीके, sponsored products, search results, seller की पहचान और return-refund की जानकारी पर पड़ेगा।

पिछले 30 दिनों की सबसे कम कीमत को prior price मानने से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए discount की पहचान करना आसान होगा। Dark patterns की वार्षिक जांच और sponsored listing की स्पष्ट पहचान से ग्राहक बेहतर निर्णय ले सकेंगे।

नए नियम ग्राहकों को अतिरिक्त सुरक्षा देंगे, लेकिन खरीदारी करते समय कीमत, seller, warranty, return policy और अंतिम payment amount की जांच करना फिर भी जरूरी रहेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नए Online Shopping Rules कब लागू होंगे?

Consumer Protection (E-Commerce) Amendment Rules 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

Sale में पुरानी कीमत कैसे तय होगी?

Discount की घोषणा से पहले के 30 दिनों में जिस सबसे कम कीमत पर product या service उपलब्ध थी, उसे prior price माना जाएगा।

क्या Sponsored Products पर रोक लग जाएगी?

Sponsored products पर रोक नहीं लगेगी, लेकिन उनकी पहचान साफ और प्रमुख रूप से दिखानी होगी।

Dark Pattern क्या है?

Dark pattern ऐसा website या application design है जो ग्राहक पर दबाव डालकर या जरूरी जानकारी छिपाकर उससे ऐसा फैसला करवाता है जिसे वह सामान्य स्थिति में नहीं लेना चाहता।

क्या Seller का नाम Invoice में दिखाई देगा?

हां। Seller का नाम e-commerce company के नाम के समान स्पष्ट font size में invoice पर दिखाना होगा।

Imported Product के बारे में क्या जानकारी मिलेगी?

Imported product पर country of origin और importer से संबंधित जरूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।

क्या Return और Refund की जानकारी पहले मिलेगी?

हां। Marketplace को return, refund, exchange, warranty, delivery और payment से संबंधित जरूरी जानकारी खरीदारी से पहले उपलब्ध करानी होगी।

Online Shopping की शिकायत कहां की जा सकती है?

पहले संबंधित platform के grievance officer के पास शिकायत करें। समाधान न मिलने पर National Consumer Helpline के माध्यम से शिकायत की जा सकती है।

महत्वपूर्ण सूचना: यह लेख Consumer Protection (E-Commerce) Amendment Rules, 2026 से जुड़ी 10 सितंबर 2026 तक उपलब्ध सरकारी जानकारी पर आधारित है। खरीदारी या शिकायत से पहले संबंधित platform की नवीनतम policy और सरकारी सूचना जरूर देखें।

आधिकारिक स्रोत

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी