Skip to content
शुक्रवार, 18 सितंबर 2026
🔔 BREAKING NEWS
IBPS RRB Recruitment 2026: 13 हजार से अधिक पदों पर भर्तीअनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024, 22 सितंबर को मिलेगा सम्मानRashmika Mandanna बनेंगी MS Subbulakshmi: सामने आया Biopic का नाम और First Look, Kamal Haasan ने दिया पहला Clapराशिफल 2026: सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा बाकी साल? जानें करियर, धन, प्रेम और स्वास्थ्य का हालभारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ लगेगा? US House में आगे बढ़ा बिल, जानें अभी क्या फैसला बाकीOnline Shopping Rules 2027: Fake Discount पर लगेगी लगाम, 1 जनवरी से बदलेंगे ये 8 नियमUPI New Rule: ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर लगेगा 0.4% शुल्क? ग्राहक और दुकानदार समझें पूरा नियमआज का मौसम 16 सितंबर 2026: दिल्ली में भारी बारिश के आसार, गुजरात के इन जिलों में बरसेंगे बादलHyundai Bayon India: Hyundai ने नई SUV का नाम किया Confirm, जानें Launch, Price और Features पर क्या है OfficialWomen’s Asia Cup 2026: भारत ने खिताब जीतने के बाद ट्रॉफी क्यों नहीं ली? जानें पूरा मामला
राजनीति

Rajasthan Election Results 2026: निकाय चुनाव में BJP-Congress का कैसा रहा प्रदर्शन? जानें जयपुर, कोटा समेत बड़ी सीटों का हाल

Author: Hitesh kumar 0 टिप्पणियां
Hitesh kumar
Author Hitesh kumar

मैं New Samachar में Founder & Editor के रूप में समाचार और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को पाठकों तक सरल, स्पष्ट और जिम्मेदार तरीके से पहुँचाने का कार्य करता हूँ। मेरा…

Share:

Rajasthan Election Results 2026: राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव के नतीजों में BJP राज्य स्तर पर सबसे ज्यादा वार्ड जीतने वाली पार्टी बनकर सामने आई है। हालांकि कई बड़े शहरों में मुकाबला काफी करीबी रहा और कांग्रेस ने भी बीकानेर, अजमेर और पाली जैसे शहरों में मजबूत प्रदर्शन किया। इस चुनाव की एक और बड़ी बात निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन रहा, जिन्होंने 2,000 से ज्यादा वार्ड जीतकर कई निकायों में आगे की तस्वीर दिलचस्प बना दी है।

जयपुर में BJP बहुमत का आंकड़ा पार कर चुकी है। उदयपुर और भीलवाड़ा में भी पार्टी को साफ बढ़त मिली है। वहीं बीकानेर में कांग्रेस को बहुमत मिला, अजमेर और पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और जोधपुर में BJP और कांग्रेस के बीच मुकाबला लगभग बराबरी का रहा।

कुछ मतदान केंद्रों पर EVM से वोटों का डेटा नहीं मिल पाने के कारण दोबारा मतदान का फैसला भी लिया गया है। इसलिए कुछ वार्डों की अंतिम स्थिति 17 सितंबर की मतगणना के बाद साफ होगी।

इस खबर में क्या है?

राजस्थान में किस पार्टी ने कितने वार्ड जीते?

15 सितंबर तक उपलब्ध परिणामों में 10,235 वार्डों के नतीजे घोषित हो चुके थे। इनमें BJP ने 4,179 वार्ड जीते। कांग्रेस को 3,613 वार्डों में जीत मिली, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्ड अपने नाम किए। बाकी सीटें दूसरी पार्टियों के खाते में गईं।

पार्टी जीते वार्ड
BJP 4,179
Congress 3,613
निर्दलीय 2,273

इन आंकड़ों से BJP की बढ़त साफ दिखाई देती है, लेकिन वोट शेयर की तस्वीर मुकाबले को कहीं ज्यादा करीबी दिखाती है।

वोट शेयर में BJP और कांग्रेस के बीच बहुत कम अंतर

BJP को करीब 35.18 प्रतिशत वोट मिले, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर लगभग 34.24 प्रतिशत रहा। दोनों के बीच अंतर एक प्रतिशत अंक से भी कम है।

यानी वार्डों की संख्या में BJP की बढ़त बड़ी दिखाई देती है, लेकिन कुल वोटों के हिसाब से दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच मुकाबला काफी नजदीकी रहा। स्थानीय निकाय चुनाव में उम्मीदवार की अपनी पकड़ और वार्ड स्तर के मुद्दों का असर भी इस अंतर को समझने में महत्वपूर्ण है।

जयपुर में BJP ने बहुमत का आंकड़ा पार किया

150 वार्ड वाले जयपुर नगर निगम में BJP ने 78 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। निगम में बहुमत के लिए 76 सीटों की जरूरत है। कांग्रेस को 53 सीटें मिली हैं और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 15 वार्ड जीते हैं।

हालांकि जयपुर के वार्ड नंबर 9, 18, 25 और 34 से जुड़े कुछ मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान होना है। इन वार्डों की अंतिम स्थिति पुनर्मतदान और मतगणना के बाद साफ होगी। इसके बावजूद BJP पहले ही बहुमत के जरूरी आंकड़े से आगे निकल चुकी है।

कोटा में BJP को बहुमत

कोटा नगर निगम में BJP ने 55 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है। 100 वार्ड वाले निगम में बहुमत के लिए 51 सीटें चाहिए।

कोटा के कुछ मतदान केंद्रों पर EVM से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आने के बाद पुनर्मतदान का फैसला लिया गया है। इसलिए बाकी दलों की अंतिम सीट संख्या दोबारा मतदान के बाद ही पूरी तरह साफ होगी।

उदयपुर में BJP का मजबूत प्रदर्शन

उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में BJP ने 53 सीटें जीती हैं। कांग्रेस के खाते में 23 सीटें गईं और चार सीटें अन्य उम्मीदवारों ने जीतीं।

यहां BJP को स्पष्ट बहुमत मिला है, इसलिए बोर्ड बनाने के लिए पार्टी को दूसरे दलों या निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

भीलवाड़ा में भी BJP को साफ बहुमत

भीलवाड़ा नगर निगम की 70 सीटों में BJP ने 45 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 10 सीटें मिलीं और 15 सीटें अन्य उम्मीदवारों के खाते में गईं।

भीलवाड़ा में BJP की बढ़त उन बड़े नगर निगमों में शामिल रही जहां मुकाबला एकतरफा दिखाई दिया।

बीकानेर में कांग्रेस ने जीता बहुमत

बीकानेर नगर निगम में तस्वीर उलट रही। यहां कांग्रेस ने 80 में से 42 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। BJP को 27 सीटें मिलीं, जबकि अन्य उम्मीदवारों ने 11 सीटें जीतीं।

राज्य स्तर पर BJP आगे रहने के बावजूद बीकानेर का परिणाम कांग्रेस के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

अजमेर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी

अजमेर के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37 सीटें जीतीं। BJP को 32 सीटें मिलीं और 11 सीटों पर अन्य उम्मीदवार जीते।

यहां किसी एक पार्टी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में बोर्ड गठन के समय निर्दलीय और अन्य पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।

पाली में भी कांग्रेस BJP से आगे

पाली नगर निगम की 65 सीटों में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतीं, जबकि BJP को 21 सीटें मिलीं। अन्य उम्मीदवारों के खाते में 15 सीटें गईं।

पाली में भी किसी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिला है। ऐसे निकायों में चुनाव नतीजे आने के बाद भी राजनीतिक गणित खत्म नहीं होता क्योंकि बोर्ड बनाने के लिए समर्थन जुटाना पड़ता है।

अलवर में BJP सबसे बड़ी पार्टी

अलवर नगर निगम के 65 वार्डों में BJP को 28 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने 23 सीटें जीतीं और अन्य उम्मीदवारों के खाते में 14 सीटें गईं।

BJP यहां सबसे बड़ी पार्टी जरूर है, लेकिन अकेले बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर पाई है।

जोधपुर में मुकाबला बेहद करीबी

जोधपुर नगर निगम में BJP और कांग्रेस दोनों ने 44-44 वार्ड जीतकर मुकाबले को लगभग बराबरी पर ला दिया है। कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान की स्थिति के कारण यहां अंतिम तस्वीर पर नजर बनी हुई है।

जोधपुर जैसे निकाय में निर्दलीय और दूसरे दलों के पार्षद बोर्ड गठन के समय अहम भूमिका निभा सकते हैं।

भरतपुर में निर्दलीय सबसे आगे

भरतपुर का नतीजा इस चुनाव की सबसे अलग तस्वीर पेश करता है। यहां 65 वार्डों में अन्य और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 38 सीटें जीतीं। BJP के खाते में 20 सीटें गईं और कांग्रेस को सात सीटें मिलीं।

यह नतीजा बताता है कि स्थानीय निकाय चुनाव में मतदाता हमेशा केवल बड़ी पार्टी के नाम पर वोट नहीं करते। वार्ड के उम्मीदवार की पहचान, स्थानीय काम और व्यक्तिगत संपर्क भी काफी मायने रखते हैं।

बड़े नगर निगमों में अब तक की स्थिति

नगर निगम BJP Congress अन्य
जयपुर 78 53 15, चार वार्डों में अंतिम नतीजा बाकी
उदयपुर 53 23 4
भीलवाड़ा 45 10 15
बीकानेर 27 42 11
अजमेर 32 37 11
अलवर 28 23 14
पाली 21 29 15
भरतपुर 20 7 38
जोधपुर 44 44 कुछ सीटों की अंतिम स्थिति बाकी
कोटा 55 अंतिम आंकड़ा पुनर्मतदान के बाद साफ होगा अंतिम आंकड़ा पुनर्मतदान के बाद साफ होगा

निर्दलीय उम्मीदवारों ने क्यों खींचा ध्यान?

इस चुनाव में BJP और कांग्रेस के साथ निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी खास रहा। राज्यभर में 2,273 निर्दलीय उम्मीदवारों ने वार्ड जीते हैं।

नगर निकाय चुनाव में मतदाता अक्सर उम्मीदवार को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। पानी, सड़क, सफाई, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और मोहल्ले की दूसरी समस्याएं सीधे पार्षद से जुड़ी होती हैं। यही वजह है कि कई जगह पार्टी के मुकाबले उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ ज्यादा असर डालती है।

जहां किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय पार्षद आने वाले दिनों में बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

BJP के लिए नतीजों का क्या मतलब है?

BJP राज्यभर में सबसे ज्यादा वार्ड जीतने वाली पार्टी रही है। जयपुर में बहुमत पार करना और उदयपुर, भीलवाड़ा तथा कोटा जैसे बड़े नगर निगमों में मजबूत प्रदर्शन पार्टी के लिए महत्वपूर्ण नतीजे हैं।

इसके साथ यह भी ध्यान देने वाली बात है कि हर शहर में नतीजे एक जैसे नहीं रहे। बीकानेर में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया और कई दूसरे शहरों में BJP को बोर्ड बनाने के लिए दूसरे पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।

कांग्रेस के लिए चुनाव में क्या रहा?

कांग्रेस राज्य स्तर पर BJP से पीछे रही, लेकिन कुछ बड़े शहरों में उसका प्रदर्शन मजबूत रहा। बीकानेर में पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। अजमेर और पाली में कांग्रेस BJP से ज्यादा सीटें जीतने में सफल रही। जोधपुर में भी दोनों पार्टियों का मुकाबला बराबरी के करीब रहा।

वोट शेयर में दोनों दलों के बीच एक प्रतिशत अंक से भी कम का अंतर यह भी दिखाता है कि शहरी मतदाताओं के बीच मुकाबला पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा।

कहां होना है दोबारा मतदान?

जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के कुछ बूथों के साथ कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका के एक मतदान केंद्र पर EVM से वोटों का डेटा नहीं मिल पाने की समस्या सामने आई। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रभावित बूथों पर पुनर्मतदान कराने का फैसला किया।

इन मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर को दोबारा मतदान और 17 सितंबर को मतगणना होनी है। इसके बाद संबंधित वार्डों की अंतिम स्थिति सामने आएगी।

Rajasthan Election Results 2026 से जुड़े सवाल

राजस्थान निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा वार्ड किसने जीते?

15 सितंबर तक घोषित नतीजों में BJP ने सबसे ज्यादा 4,179 वार्ड जीते हैं। कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्ड जीते हैं।

जयपुर नगर निगम में किसकी जीत हुई?

जयपुर में BJP ने 78 सीटें जीतकर बहुमत के लिए जरूरी 76 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया है। कांग्रेस को 53 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिली हैं। चार वार्डों की अंतिम स्थिति पुनर्मतदान के बाद साफ होगी।

कोटा में कौन आगे है?

कोटा नगर निगम में BJP ने 55 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है। कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान के कारण अंतिम पार्टीवार संख्या बाद में साफ होगी।

बीकानेर में किस पार्टी को बहुमत मिला?

बीकानेर में कांग्रेस ने 80 में से 42 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है।

जोधपुर में क्या स्थिति है?

जोधपुर में BJP और कांग्रेस ने 44-44 सीटें जीती हैं। कुछ मतदान केंद्रों की अंतिम स्थिति आने के बाद पूरी तस्वीर साफ होगी।

BJP और कांग्रेस का वोट शेयर कितना रहा?

BJP का वोट शेयर करीब 35.18 प्रतिशत और कांग्रेस का करीब 34.24 प्रतिशत रहा। दोनों के बीच अंतर एक प्रतिशत अंक से भी कम है।

क्या राजस्थान निकाय चुनाव के सभी नतीजे आ गए हैं?

ज्यादातर नतीजे घोषित हो चुके हैं, लेकिन कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान होना बाकी है। प्रभावित वार्डों की मतगणना 17 सितंबर को होगी।

निष्कर्ष

राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में BJP ने राज्य स्तर पर सबसे ज्यादा वार्ड जीतकर बढ़त बनाई है। जयपुर में पार्टी बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी है, जबकि उदयपुर, भीलवाड़ा और कोटा में भी उसका प्रदर्शन मजबूत रहा।

कांग्रेस के लिए बीकानेर बड़ी सफलता रहा, जबकि अजमेर और पाली में भी पार्टी BJP से आगे रही। जोधपुर में मुकाबला लगभग बराबरी का है। वहीं भरतपुर समेत कई जगह निर्दलीय उम्मीदवारों ने दिखाया कि स्थानीय चुनाव में उम्मीदवार और स्थानीय मुद्दे भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं जितना पार्टी का नाम।

कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान बाकी है, इसलिए प्रभावित वार्डों की अंतिम स्थिति 17 सितंबर की मतगणना के बाद साफ होगी।