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Ganesh Ji Ki Aarti: गणेश उत्सव में कब और कैसे करें गणपति की आरती? जानें सही समय, विधि और महत्व

Author: Hitesh kumar 1 टिप्पणियां
Hitesh kumar
Author Hitesh kumar

मैं New Samachar में Founder & Editor के रूप में समाचार और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को पाठकों तक सरल, स्पष्ट और जिम्मेदार तरीके से पहुँचाने का कार्य करता हूँ। मेरा…

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Ganesh Ji Ki Aarti: गणेश उत्सव के दौरान सुबह और शाम घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक गणपति बप्पा की आरती की जाती है। परिवार के लोग एक साथ दीप जलाकर बप्पा को भोग लगाते हैं और सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। अगर आपके घर में भी गणपति विराजमान हैं, तो यह जानना उपयोगी है कि आरती कब करें, आरती से पहले क्या तैयारी रखें और पूजा के दौरान किन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें।

साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई गई और इसी के साथ गणेशोत्सव की शुरुआत हुई। अलग-अलग परिवार अपनी परंपरा के अनुसार बप्पा को डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या अनंत चतुर्दशी तक घर में विराजमान रखते हैं। इस दौरान रोज गणेश जी की पूजा और आरती की जा सकती है।

गणेश जी की आरती के लिए किसी बहुत जटिल व्यवस्था की जरूरत नहीं होती। साफ पूजा स्थान, दीपक, फूल, प्रसाद और श्रद्धा के साथ परिवार के सदस्य मिलकर सरल तरीके से आरती कर सकते हैं।

इस खबर में क्या है?

गणेश जी की आरती कब करनी चाहिए?

घर में स्थापित गणपति की आरती सामान्य रूप से सुबह की पूजा के बाद और शाम को दीप जलाने के समय की जाती है। कई परिवार दोनों समय आरती करते हैं, जबकि कुछ घरों में केवल शाम की सामूहिक आरती की परंपरा होती है।

सुबह स्नान और पूजा के बाद आरती की जा सकती है। शाम की आरती सूर्यास्त के आसपास या परिवार के सभी सदस्यों के घर आने के बाद की जा सकती है। परिवार में वर्षों से कोई निश्चित समय चला आ रहा हो तो उसी परंपरा को प्राथमिकता देना बेहतर है।

यह भी समझना जरूरी है कि रोज की आरती के लिए पूरे देश में लागू होने वाला कोई एक निश्चित घड़ी का समय नहीं होता। पूजा का समय स्थान, पारिवारिक परंपरा और सुविधा के अनुसार बदल सकता है।

क्या गणेश जी की आरती के लिए शुभ मुहूर्त जरूरी है?

गणेश चतुर्थी के दिन मूर्ति स्थापना और मुख्य पूजा के लिए पंचांग में मध्याह्न पूजा का विशेष समय देखा जाता है। 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को थी। दिल्ली में उस दिन मध्याह्न गणेश पूजा का समय लगभग सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया था।

लेकिन गणेशोत्सव के बाकी दिनों में होने वाली दैनिक आरती को केवल इसी समय में करने की जरूरत नहीं है। घर में सुबह और शाम श्रद्धा के साथ नियमित आरती की जा सकती है।

यह भी पढ़ें: Ganesh Visarjan 2026 Today: आज डेढ़ दिन के गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त और विधि

गणेश जी की आरती से पहले क्या तैयारी करें?

आरती शुरू करने से पहले पूजा स्थान को साफ रखें। अगर सुबह की पूजा है तो स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा करना बेहतर माना जाता है। शाम की आरती से पहले भी पूजा स्थान को व्यवस्थित कर लें।

आरती की थाली में जरूरत के अनुसार ये चीजें रखी जा सकती हैं:

  • घी या तेल का दीपक
  • रुई की बाती
  • अगरबत्ती या धूप
  • फूल
  • दूर्वा, अगर उपलब्ध हो
  • मोदक, लड्डू, फल या घर में बना प्रसाद
  • कपूर, अगर आपके घर में इस्तेमाल करने की परंपरा हो
  • आरती की थाली

पूजा सामग्री की सूची हर परिवार में अलग हो सकती है। अगर कोई सामग्री उपलब्ध नहीं है तो केवल उसी वजह से पूजा रोकने की जरूरत नहीं है। श्रद्धा और स्वच्छता को प्राथमिकता दें।

घर पर गणेश जी की आरती कैसे करें?

1. पूजा स्थान साफ करें

सबसे पहले गणपति बप्पा के आसपास का स्थान साफ करें। पुराने फूल खराब हो गए हों तो उन्हें सम्मानपूर्वक हटा दें और जरूरत हो तो नए फूल अर्पित करें।

2. दीपक जलाएं

गणेश जी के सामने दीपक जलाएं। अगरबत्ती या धूप इस्तेमाल करते हैं तो उसे भी जला सकते हैं। छोटे बच्चों के आसपास दीपक और कपूर रखते समय विशेष सावधानी रखें।

3. फूल और दूर्वा अर्पित करें

गणपति को फूल और दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। उपलब्ध सामग्री को श्रद्धा के साथ चढ़ाएं। इसे दिखावे की पूजा बनाने के बजाय सरल रखना बेहतर है।

4. गणपति को भोग लगाएं

मोदक गणेश जी से जुड़ा लोकप्रिय प्रसाद है। मोदक उपलब्ध न हों तो लड्डू, फल या घर में बना सात्विक प्रसाद अर्पित किया जा सकता है।

अगर आपके परिवार में किसी विशेष प्रकार का भोग लगाने की परंपरा है तो उसी को प्राथमिकता दें।

5. परिवार के साथ आरती करें

अब परिवार के सदस्य गणपति बप्पा के सामने खड़े होकर या बैठकर आरती कर सकते हैं। बहुत से घरों में पारंपरिक गणेश आरती की शुरुआत “जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा” से की जाती है।

आरती के समय जल्दी करने की जरूरत नहीं है। परिवार के लोग शांत मन से आरती करें और बच्चों को भी पूजा में शामिल कर सकते हैं।

6. आरती की थाली घुमाएं

दीपक वाली आरती की थाली को सावधानीपूर्वक भगवान के सामने घुमाया जाता है। आग के बहुत करीब कपड़ा, फूलों की सजावट या कागज न रखें।

अगर घर में छोटे बच्चे हैं तो आरती की थाली किसी बड़े व्यक्ति के हाथ में ही रहनी चाहिए।

7. प्रार्थना और प्रसाद

आरती पूरी होने के बाद कुछ समय शांत होकर प्रार्थना करें। परिवार के सुख, स्वास्थ्य, समझदारी और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति की कामना की जा सकती है।

इसके बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और उपस्थित लोगों में बांट दें।

गणेश जी की आरती का क्या महत्व है?

हिंदू परंपरा में भगवान गणेश को बुद्धि, शुभ शुरुआत और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। किसी नए कार्य से पहले गणपति का स्मरण करने की परंपरा भी इसी भाव से जुड़ी है।

आरती केवल धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिवार के लोगों को रोज कुछ समय एक साथ बिताने का अवसर भी देती है। गणेश उत्सव के दौरान घर में सुबह या शाम सभी सदस्यों का एक साथ पूजा में शामिल होना त्योहार को अधिक जीवंत बनाता है।

आरती का उद्देश्य केवल मनोकामना मांगना नहीं होना चाहिए। इसे कृतज्ञता, अनुशासन और अच्छे कार्यों का संकल्प लेने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है।

गणपति को कौन सा भोग लगाएं?

गणेश उत्सव में मोदक सबसे लोकप्रिय भोग में शामिल है। इसके अलावा परिवार की परंपरा और उपलब्धता के अनुसार लड्डू, फल, नारियल या घर में बनी दूसरी सात्विक मिठाई भी रखी जा सकती है।

बहुत ज्यादा प्रकार का प्रसाद रखने की जरूरत नहीं है। जितना प्रसाद परिवार में बांटा जा सके उतना ही तैयार करना भोजन की बर्बादी से बचने का अच्छा तरीका है।

यह भी पढ़ें: Ganesh Utsav Special Modak Recipe: बिना सफेद चीनी के 20 मिनट में बनाएं चॉकलेट-पिस्ता मोदक

सुबह और शाम की आरती में क्या अंतर है?

सुबह की आरती आमतौर पर दिन की शुरुआत में की जाने वाली पूजा का हिस्सा होती है। इस समय गणपति को फूल, दूर्वा और भोग अर्पित करके दिन के लिए शुभकामना की जाती है।

शाम की आरती में परिवार के अधिक सदस्य एक साथ शामिल हो पाते हैं। कई सोसायटी और सार्वजनिक पंडालों में भी शाम की आरती ज्यादा सामूहिक रूप से आयोजित की जाती है।

दोनों में से कौन-सी आरती ज्यादा महत्वपूर्ण है, इसका कोई एक नियम नहीं है। परिवार की परंपरा के अनुसार एक या दोनों समय आरती की जा सकती है।

क्या आरती रोज करनी चाहिए?

अगर घर में गणपति की स्थापना की गई है तो कई परिवार विसर्जन तक रोज सुबह और शाम आरती करते हैं। कुछ परिवार केवल एक समय पूजा और आरती करते हैं।

अगर किसी दिन नौकरी, यात्रा या दूसरी वजह से निश्चित समय पर आरती करना संभव नहीं हो पाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। परिवार की परिस्थिति के अनुसार सुविधाजनक समय पर पूजा की जा सकती है।

गणेश जी की आरती करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

दीपक या कपूर जलाकर पूजा स्थान को अकेला छोड़ने से बचें। पर्दे, कपड़े, कागज और प्लास्टिक की सजावट को आग से पर्याप्त दूरी पर रखें।

पूजा के नाम पर बहुत ज्यादा भोजन तैयार करके बाद में फेंकने से बचें। प्रसाद उतना ही बनाएं जितना उपयोग हो सके।

फूल, प्लास्टिक सजावट और दूसरे पूजा सामान को नदी या तालाब में डालने से बचें। गणेश उत्सव मनाते समय पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।

आरती को किसी डर या चमत्कार की गारंटी से न जोड़ें। पूजा व्यक्तिगत आस्था का विषय है। केवल आरती करने से किसी बीमारी, आर्थिक समस्या या दूसरी परेशानी के निश्चित रूप से खत्म होने का दावा करना उचित नहीं है।

बच्चों को गणेश आरती में कैसे शामिल करें?

गणेश उत्सव बच्चों को भारतीय त्योहारों और पारिवारिक परंपराओं के बारे में समझाने का अच्छा अवसर हो सकता है। बच्चों को फूल रखने, प्रसाद की थाली सजाने या आरती के समय परिवार के साथ शामिल होने दिया जा सकता है।

उन्हें यह भी समझाएं कि पूजा के साथ साफ-सफाई, भोजन की बर्बादी न करना और पर्यावरण की देखभाल भी त्योहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

दीपक, कपूर और अगरबत्ती जैसी चीजें हमेशा किसी बड़े व्यक्ति की निगरानी में ही बच्चों को संभालने दें।

पंडाल में आरती के लिए जाएं तो क्या ध्यान रखें?

सार्वजनिक गणेश पंडालों में शाम के समय भीड़ ज्यादा हो सकती है। परिवार के साथ जा रहे हैं तो बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें।

पंडाल समिति की प्रवेश और निकास व्यवस्था का पालन करें। भीड़ में धक्का-मुक्की न करें और दर्शन या आरती के लिए बनाए गए क्रम को बनाए रखें।

अगर पंडाल में मोबाइल या फोटोग्राफी को लेकर कोई नियम हो तो उसका सम्मान करें। पूजा के समय तेज आवाज में फोन पर बातचीत करने से भी बचना बेहतर है।

गणेशोत्सव 2026 कब तक चलेगा?

2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई गई। मुख्य गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी पर बड़े गणपति विसर्जन के साथ 25 सितंबर 2026 को होगा।

हालांकि सभी घरों में गणपति इतने दिनों तक नहीं रखे जाते। कई परिवार डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन या सात दिन बाद अपनी परंपरा के अनुसार विसर्जन करते हैं।

गणेश जी की आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गणेश जी की आरती सुबह कितने बजे करनी चाहिए?

सुबह स्नान और नियमित पूजा के बाद गणेश जी की आरती की जा सकती है। रोज की आरती के लिए पूरे देश में लागू होने वाला कोई एक निश्चित समय नहीं है। अपने परिवार की पूजा परंपरा को प्राथमिकता दें।

गणेश जी की शाम की आरती कब करें?

शाम को सूर्यास्त के आसपास या परिवार के सभी सदस्यों की सुविधा के अनुसार दीप जलाकर आरती की जा सकती है। सार्वजनिक पंडालों में आरती का समय समिति तय करती है।

क्या गणेश जी की आरती दिन में दो बार करना जरूरी है?

यह परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है। कई परिवार सुबह और शाम दोनों समय आरती करते हैं, जबकि कुछ घरों में एक समय की पूजा की जाती है।

गणेश जी को आरती से पहले क्या भोग लगाएं?

मोदक लोकप्रिय भोग है। इसके अलावा लड्डू, फल या परिवार की परंपरा के अनुसार घर में बना सात्विक प्रसाद लगाया जा सकता है।

अगर मोदक नहीं हैं तो क्या आरती कर सकते हैं?

हां। किसी एक विशेष प्रसाद का होना आरती करने की शर्त नहीं है। उपलब्ध फल या सात्विक प्रसाद अर्पित करके भी पूजा की जा सकती है।

क्या बच्चों को आरती की थाली दे सकते हैं?

छोटे बच्चों को जलते दीपक या कपूर वाली आरती की थाली अकेले नहीं देनी चाहिए। किसी बड़े व्यक्ति की निगरानी में ही उन्हें पूजा में शामिल करें।

Ganeshotsav 2026 का मुख्य विसर्जन कब है?

2026 में अनंत चतुर्दशी के दिन मुख्य गणेश विसर्जन 25 सितंबर को होगा। घरों में विसर्जन की तारीख पारिवारिक परंपरा के अनुसार इससे पहले भी हो सकती है।

यह भी पढ़ें: ऋषि पंचमी 2026: पूजा मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और जरूरी नियम

निष्कर्ष

गणेश उत्सव के दौरान गणपति बप्पा की आरती घर के माहौल को भक्तिमय बनाने के साथ परिवार को एक साथ पूजा में शामिल होने का अवसर देती है। सुबह की पूजा के बाद या शाम को दीप जलाकर सरल तरीके से आरती की जा सकती है।

आरती के लिए बहुत ज्यादा सामग्री या जटिल विधि की जरूरत नहीं है। साफ पूजा स्थान, दीपक, फूल, उपलब्ध प्रसाद और श्रद्धा के साथ पूजा की जा सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि त्योहार को सुरक्षित, स्वच्छ और जिम्मेदारी के साथ मनाया जाए।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य धार्मिक परंपराओं और प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। पूजा की विधि और समय अलग-अलग परिवारों तथा क्षेत्रों में अलग हो सकते हैं। अपने घर की पारंपरिक पूजा-पद्धति और स्थानीय धार्मिक परंपरा को प्राथमिकता दें।