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धर्म / त्योहार

Pitru Paksha 2026 कब से शुरू होगा? देखें श्राद्ध की सभी तिथियां

Author: Hitesh kumar • •0 टिप्पणियां
Hitesh kumar
Author Hitesh kumar

मैं New Samachar में Founder & Editor के रूप में समाचार और जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को पाठकों तक सरल, स्पष्ट और जिम्मेदार तरीके से पहुँचाने का कार्य करता हूँ। मेरा…

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Pitru Paksha 2026 को लेकर इस बार 26 और 27 सितंबर की तारीख को लेकर भ्रम बना हुआ है। वर्ष 2026 में पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को किया जाएगा, जबकि प्रतिपदा श्राद्ध के साथ मुख्य पितृ पक्ष 27 सितंबर से शुरू होगा। इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा। यहां पूरा श्राद्ध कैलेंडर आसान भाषा में दिया गया है।

Pitru Paksha 2026 कब से शुरू होगा?

वर्ष 2026 में पूर्णिमा श्राद्ध शनिवार, 26 सितंबर को किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी रविवार, 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष की मुख्य श्राद्ध तिथियां शुरू होंगी।

पितृ पक्ष का समापन शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस तरह पूर्णिमा श्राद्ध को शामिल करें तो धार्मिक कार्यक्रम 26 सितंबर से शुरू होंगे, जबकि प्रतिपदा से आरंभ होने वाला मुख्य पितृ पक्ष 27 सितंबर से माना जाएगा।

पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर की रात शुरू होकर 26 सितंबर की रात समाप्त होगी। इसी कारण पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को रखा गया है।

Pitru Paksha 2026 का पूरा श्राद्ध कैलेंडर

तारीख दिन श्राद्ध तिथि
26 सितंबर 2026 शनिवार पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर 2026 रविवार प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर 2026 सोमवार द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर 2026 मंगलवार तृतीया और महा भरणी श्राद्ध
30 सितंबर 2026 बुधवार चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2026 गुरुवार षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2026 शुक्रवार सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2026 शनिवार अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2026 रविवार नवमी श्राद्ध या मातृ नवमी
5 अक्टूबर 2026 सोमवार दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2026 मंगलवार एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2026 बुधवार द्वादशी और मघा श्राद्ध
8 अक्टूबर 2026 गुरुवार त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर 2026 शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर 2026 शनिवार सर्वपितृ अमावस्या

30 सितंबर को दो श्राद्ध तिथियां क्यों हैं?

वर्ष 2026 के श्राद्ध कैलेंडर में 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी—दोनों तिथियों का श्राद्ध बताया गया है। चंद्र तिथियां अंग्रेजी तारीख की तरह पूरे 24 घंटे की नहीं होतीं। एक तिथि दिन के बीच में समाप्त होकर दूसरी तिथि शुरू हो सकती है।

श्राद्ध की तारीख तय करते समय केवल सूर्योदय नहीं, बल्कि अपराह्न काल में मौजूद तिथि को भी देखा जाता है। इसी पंचांग गणना के कारण एक ही दिन दो श्राद्ध तिथियां पड़ सकती हैं।

परिवार में श्राद्ध की कोई पुरानी परंपरा हो या सही समय को लेकर संदेह हो तो स्थानीय पंचांग और जानकार पुरोहित से पुष्टि करना उचित रहेगा।

पितृ पक्ष का धार्मिक महत्व

हिंदू परंपरा में पितृ पक्ष को अपने दिवंगत पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस दौरान परिवार के लोग मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं।

श्राद्ध का अर्थ केवल कोई धार्मिक प्रक्रिया पूरी करना नहीं है। इसका मूल भाव अपने पूर्वजों को श्रद्धा से याद करना और परिवार को उनसे मिले संस्कारों के प्रति आभार व्यक्त करना है।

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में श्राद्ध करने की विधि अलग हो सकती है। कई परिवार घर पर सरल रूप से तर्पण करते हैं, जबकि कुछ लोग गया, प्रयागराज, हरिद्वार या दूसरे धार्मिक स्थानों पर जाकर पिंडदान करते हैं।

किस तिथि पर श्राद्ध करना चाहिए?

सामान्य परंपरा के अनुसार व्यक्ति का श्राद्ध उसी हिंदू तिथि पर किया जाता है, जिस तिथि पर उसका निधन हुआ था। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति की मृत्यु नवमी तिथि पर हुई हो तो उसका श्राद्ध पितृ पक्ष की नवमी पर किया जाता है।

केवल अंग्रेजी तारीख देखकर श्राद्ध की तिथि तय करना सही नहीं माना जाता। यदि परिवार को दिवंगत सदस्य की मृत्यु की हिंदू तिथि मालूम नहीं है तो सर्वपितृ अमावस्या पर उनका श्राद्ध किया जा सकता है।

मातृ नवमी 2026 कब है?

वर्ष 2026 में मातृ नवमी रविवार, 4 अक्टूबर को है। इस दिन परिवार की दिवंगत महिलाओं, विशेष रूप से माता और सौभाग्यवती अवस्था में दिवंगत हुई महिलाओं के श्राद्ध की परंपरा प्रचलित है।

पूजा और श्राद्ध की विधि परिवार तथा क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता देना बेहतर है।

चतुर्दशी श्राद्ध का क्या महत्व है?

चतुर्दशी श्राद्ध 9 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। धार्मिक परंपराओं में यह तिथि उन लोगों के श्राद्ध से जोड़ी जाती है जिनकी मृत्यु दुर्घटना, हिंसा या किसी दूसरी असामान्य परिस्थिति में हुई हो।

यह संवेदनशील विषय है। इसलिए परिवार को अपनी परिस्थिति और परंपरा के अनुसार किसी योग्य पुरोहित से सही विधि समझ लेनी चाहिए।

सर्वपितृ अमावस्या 2026 कब है?

सर्वपितृ अमावस्या शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को होगी। इसे महालय अमावस्या भी कहा जाता है और यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है।

जिन लोगों को अपने पूर्वज की सही मृत्यु तिथि मालूम नहीं है या किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाए, वे प्रचलित परंपरा के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या पर सभी पितरों का स्मरण कर सकते हैं।

पितृ पक्ष में सामान्य रूप से क्या किया जाता है?

पितृ पक्ष में परिवार की परंपरा के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। कई परिवार दिवंगत पूर्वजों को याद करके जरूरतमंद लोगों को भोजन या उपयोगी वस्तुएं देते हैं।

इस दौरान दिखावे या डर के बजाय श्रद्धा और कृतज्ञता को महत्व देना चाहिए। भोजन की बर्बादी से बचना और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद की सहायता करना अधिक जिम्मेदार तरीका है।

श्राद्ध की विस्तृत विधि परिवार, संप्रदाय और क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है। इसलिए किसी कठिन धार्मिक प्रक्रिया को बिना जानकारी के करने के बजाय परिवार के बुजुर्ग या योग्य पुरोहित से मार्गदर्शन लेना बेहतर है।

पितृ पक्ष 2026 से जुड़े सामान्य सवाल

पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 26 या 27 सितंबर से होगी?

पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को होगा। प्रतिपदा श्राद्ध के साथ मुख्य पितृ पक्ष 27 सितंबर 2026 से शुरू होगा।

पितृ पक्ष 2026 कब समाप्त होगा?

पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।

सर्वपितृ अमावस्या पर किसका श्राद्ध किया जाता है?

धार्मिक परंपरा के अनुसार जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया, उनका स्मरण सर्वपितृ अमावस्या पर किया जा सकता है।

क्या अलग-अलग शहरों में श्राद्ध का समय बदल सकता है?

हां। सूर्योदय, अपराह्न काल और तिथि की अवधि स्थान के अनुसार बदल सकती है। इसलिए सही समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखना चाहिए।

निष्कर्ष

Pitru Paksha 2026 में पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को होगा और प्रतिपदा श्राद्ध के साथ मुख्य पितृ पक्ष 27 सितंबर से शुरू होगा। इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा। पाठक अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार सही तिथि तथा समय की पुष्टि जरूर करें।

संदर्भ आधार

लेख की तिथियां वर्ष 2026 की पंचांग गणनाओं और प्रकाशित श्राद्ध कैलेंडर के मिलान पर आधारित हैं। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार श्राद्ध के समय में अंतर हो सकता है।

डिस्क्लेमर

यह लेख धार्मिक परंपराओं और पंचांग पर आधारित सामान्य जानकारी के लिए है। श्राद्ध की विधि, तिथि और समय स्थान तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग और योग्य पुरोहित से सलाह लें।